सूदखोरों के मकड़जाल में नगर पालिका के सफाईकर्मी ! 50 हजार से अधिक की तनख्वाह फिर भी कर्जे में डूबे..कुछ यूं चलता है नेटवर्क

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर : पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर पालिका के कई स्थाई सफाईकर्मी इस वक्त सूदखोरों के मकड़जाल में बुरी तरह से फंसे हुए है। 50 हजार से अधिक तनख्वाह होने के बाजूजूद भी कर्ज़ में डूबे हुए है। सूत्रों के अनुसार सूदखोरों का नेटवर्क इतना तगड़ा है कि कर्मचारी के खाते में तनख्वाह, पीएफ, पेंशन या फिर रिटायरमेंट के समय मिले वाले रुपए पहुंचते ही इसकी भनक उन्हें लग जाती है। उसके बाद शुरू हो जाता है कर्मचारी पर दबाव बना कर रूपये ऐंठने का खेल। सूत्र बताते है कि सूदखोरों का डर भी इन कर्मचारियों पर इस कदर छाया रहता है कि दुर्व्यवहार के बाद ये अपना मुंह किसी के आगे नहीं खोलते हैं । सारा खेल कैश ने होने के कारण सरकारी तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लग पाती है ।
05 से 15 प्रतिशत ब्याज पर मिलता है कर्ज
नगर पालिका के कर्मचारियों के ब्याज पर रूपये बांटने वाले गणित में इतने तेज है कि दो लाख रूपये का कर्ज कब 15 लाख में तब्दील हो जाएगा ये कर्ज लेने वालो को भी पता भी चलता है। सूत्रों के अनुसार नगर पालिका में कार्यरत अधिकतर सफाईकर्मियों ने 5 से 15 प्रतिशत मासिक ब्याज पर सूदखोरों से कर्जा ले रखा है ।
ब्याज लेने वसूलने के लिए लोन भी दिलवाते है सूदखोर !
सूद पर रूपये बांटने वालो की सेटिंग ऐसी कि ब्याज का रुपए वसूलने के लिए कर्मचारी को बैंकों से लोन भी आसानी से दिलवा देते है। सूत्र बताते है कि सरकारी कर्मचारी को तनख्वाह के आधार पर दलालों के जरिए इन्हें आसानी से लोन भी मिल जाता है । सूदखोरों के मकड़जाल में सफाईकर्मी कुछ इस कदर फंसे है कि कर्ज उतारने के लिए कर्ज ले लेते हैं कर्मचारी
बैंकों के सीसी कैमरे खोल सकते है राज
नगर में सूदखोरों के नेटवर्क सरकारी तंत्र की इच्छाशक्ति की कमी के चलते तेजी से फैल गया है। हालांकि तंत्र चाहे तो इन पर आसानी से नकेल कस सकता है। सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह या फिर पीएफ आदि का पैसा खाते में आते ही बैंकों के अंदर बाहर कर्ज लिए सरकारी कर्मचारी के साथ इनकी मौजूदगी सबकुछ बयां कर देगी।
सूद ब्याज पर रूपये देने के लिए ये है नियम
उत्तर प्रदेश में सूद (ब्याज) पर रुपये बांटने के लिए शासन में स्तर पर एक एक्ट बनाया है ।इसके तहत ही कोई भी सूद ब्याज का काम कर सकता है ।
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम, 197 (Uttar Pradesh Regulation of Money-Lending Act, 1976) के तहत अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेना पड़ता है। बिना लाइसेंस के साहूकारी करना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़े कानूनी प्रावधान हैं। लाइसेंस के लिए आवेदन जिला कलेक्टर या संबंधित प्राधिकारी को करना होता है।
मुख्य नियम और प्रक्रिया:
- लाइसेंस अनिवार्य: ब्याज पर पैसा देने के लिए जिला साहूकारी अधिकारी या कलेक्टर से लाइसेंस लेना आवश्यक है।
- आवेदन प्रक्रिया: आवेदक को ‘प्रपत्र ए’ (Form A) के साथ अपना विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और वित्तीय स्थिति से जुड़े दस्तावेज जमा करने होते हैं।
- ब्याज दर: लाइसेंस प्राप्त साहूकार ही कानून के तहत निर्धारित ब्याज ले सकते हैं, अवैध रूप से अधिक ब्याज वसूलना अपराध है।
- नवीनीकरण (Renewal): यह लाइसेंस एक साल के लिए मान्य होता है और हर साल इसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
- रिकॉर्ड: साहूकार को सभी लेनदेन का लिखित हिसाब-किताब रखना अनिवार्य है।
- अवैधता: बिना लाइसेंस के ब्याज पर पैसा देने पर भारी जुर्माना और सजा हो सकती है।
- नोट : उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम, 1976 के बाबत एक बार विधि विशेषज्ञों से अवश्य समझ लें, इसमें बदलाव संभव है



