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अंग्रेजों के जमाने से बसे बाजार पर चलेगा बुलडोजर, जिन इमारतों में बीत गई तीन पुश्ते, लोग खुद से चला रहे हथौड़ा

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर : नगर में सड़क चौकड़ीकरण एक दौरान जद में आई इमारतों को तोड़ा जा रहा है । दक्षिण पटरी के बाद आज से उतरी पटरी के इमारतों पर पीडब्ल्यूडी का बुलडोजर चलेगा। हालांकि प्रशासन की सख्ती के चलते लोगों ने खुद से निर्माण को तोड़ने शुरू कर दिया । विकास, चौड़ीकरण, जाम जैसे मुद्दों के बीच आज 100 साल से अधिक पुराने बाजार पर बुलडोजर चलेगा। जीटी रोड के उत्तर तरफ बनी इमारतों में परिवारों की तीन पुश्ते बीत गई है । जिस इमारत में खेलकूद के बड़े हुए, आज लोग उसी पर खुद से हथौड़ा चलाने को विवेश है।

दरअसल पुराने शहर मुगलसराय के विकास के क्रम में सबसे पहले जीटी रोड पे उतर तरफ ही लोग बसे थे । यहां बसे कई लोगों के पास अंग्रेजों के समय के रजिस्ट्री के दस्तावेज है । कई लोगों के पास साल 1935 के रजिस्ट्री दस्तावेज भी हैं। व्यापारी बताते है कि पीडब्ल्यूडी आज जिसे डिवाइडर बता रहा है, पहले सड़क दक्षिण पटरी की तरफ थी। डिवाइडर काफी दूर था। उस समय इसे जीटी रोड के नाम से जाना जाता था। साल 2020 में पड़ाव-मुगलसराय जीटी रोड़ को स्टेट हाईवे किया गया था घोषित ।

बुजुर्ग व्यापारी जयप्रकाश जायसवाल बताते हैं कि उनके  पूर्वजों ने 28 जनवरी 1946 को भवानी प्रसाद से भूमि की रजिस्ट्री करवाई थी। भवानी प्रसाद साल 1901 से उस भूमि पर काबिज थे। आज उनके परिवार को भी यहां रहते हुए 80 साल का वक्त बीत गया है ।

शहर के बुजुर्ग व्यवससाईं विजय कुमार ने बताया कि 1971 में उनसे मकान की रजिस्ट्री करवाई थी। साल 1953 से 71 तक शरद चंद्र मेहरोत्रा के नाम से मकान था। 1953 से पहले भी ये जमीन शरद चंद्र के परिवार की थी । 1953 में परिवारिक बंटवारे में यह जमीन शरद शरद चंद्र को मिली थी। इसके बाद उन्होंने यहां बने भवन को 1953 में नगर पालिका में दर्ज करवाया था। रजिस्ट्री के बाद हम लोगों का नाम चढ़ा। इस भवन में रहते 79 साल से ज्यादा समय बीत चुका है।

शहर के बुजुर्ग व्यवसाई सतपाल सिंह ने बताया कि आज जो रास्ता सड़क जीटी रोड से एलबीएस कटरे की तरफ जाता है, वहां से लेकर राजकीय महिला चिकित्सालय से पहले तक वर्ष 1935 में विमलानंद के परिवार ने एक कटरा बनाया था । जिसका नाम प्रताप भवन  रखा था। कई लोगों ने 1947 पहले उस कटरे में दुकानें किराए पर ली थी।  बाद में लोगों ने बिमलानंदन से इसकी रजिस्ट्री करा ली।  इस इस बाजार में लोगों 80 साल से अधिक पुराने समय से रहा रहे है । जिस जमीन पर प्रताप भवन बना थी वो जमीन भी विमलानंदन के परिवार की थी । उतर तरफ के भवनों में लोगों की तीन पुश्ते बीत गई है ।

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