20 दिन, 35 CCTV और कई टीमें, पैरों में गोली मारने वाली पुलिस अब तक नहीं ढूंढ पाई लुटेरों को

—पैरों में गोली मारने वाली पुलिस 20 दिन में भी नहीं पकड़ सकी लुटेरे, क्राइम ब्रांच की ‘काबिलियत’ पर सवाल
चंदौली। जिले में अपराधियों के पैरों में गोली मारकर सुर्खियां बटोरने वाली पुलिस सराफा कारोबारी लूटकांड के 20 दिन बाद भी खाली हाथ है। अलीनगर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर गांव के समीप 28 मई की रात हुई इस दुस्साहसिक वारदात का अब तक खुलासा नहीं हो सका है। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली और क्राइम ब्रांच की काबिलियत पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना में बाइक सवार तीन बदमाशों ने सराफा व्यवसायी सुजीत कुमार को गोली मारकर गहनों से भरा बैग और नकदी लूट ली थी। गोली कारोबारी के बाएं हाथ में लगी थी। हैरत की बात यह रही कि मौके पर पहुंचे कारोबारी के बेटे और पिता ने भी बदमाशों से भिड़ने का साहस दिखाया, लेकिन हमलावर फरार होने में सफल रहे।
वारदात के बाद पुलिस ने दावा किया था कि कई टीमें लगाई गई हैं और जल्द ही अपराधी सलाखों के पीछे होंगे। सीओ पीडीडीयू नगर अरुण कुमार सिंह की निगरानी में अलीनगर पुलिस, क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम को लगाया गया। पुलिस ने घटनास्थल से करीब 30 किलोमीटर के दायरे में लगे 35 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल डाली, लेकिन नतीजा अब तक शून्य है।
दिलचस्प यह है कि पिछले कुछ महीनों में चंदौली पुलिस अपराधियों के खिलाफ मुठभेड़ों को लेकर चर्चा में रही है। कई मामलों में बदमाशों के पैरों में गोली मारकर पुलिस ने अपनी सख्ती का संदेश देने की कोशिश की थी। मगर जिले की सबसे चर्चित लूट की घटनाओं में शामिल इस मामले में पुलिस न तो बदमाशों तक पहुंच सकी है और न ही किसी संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकी है।
व्यापारी वर्ग में भी इस मामले को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब एक सराफा कारोबारी को गोली मारकर लूटने वाले अपराधी 20 दिन तक पुलिस की पकड़ से बाहर रह सकते हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल का कहना है कि जांच में कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सीसीटीवी, सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की तमाम तकनीकी कवायद के बावजूद लुटेरे पुलिस की पहुंच से दूर कैसे हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस का बहुप्रतीक्षित खुलासा पहले होता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।



