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A+ स्टेशन की बड़ी विडंबना! मुफ्त यूरिनल तक नसीब नहीं, खुले में पेशाब को मजबूर यात्री

सड़क चौड़ीकरण में तोड़ दिया गया यूरिनल, वैकल्पिक व्यवस्था नहीं; आरपीएफ बूथ के पास फैल रही दुर्गंध, बैठकों में ‘यात्री सुविधा’ के बड़े-बड़े दावे बेअसर

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर । देश के प्रमुख और A+ ग्रेड रेलवे स्टेशनों में शुमार पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्टेशन के सबसे व्यस्त सर्कुलेटिंग एरिया में यात्रियों के लिए एक भी निःशुल्क यूरिनल उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि रोजाना हजारों यात्री मजबूरी में खुले में मूत्र विसर्जन कर रहे हैं और स्टेशन परिसर दुर्गंध से भर गया है।

डीडीयू जंक्शन के गेट संख्या एक के पास खुले में पेशाब करते यात्री

सबसे खराब स्थिति गेट नंबर-1 की है। यहां आरपीएफ पिकेट के बगल में खाली पड़ी जगह अब खुले शौचालय में तब्दील हो चुकी है। हर समय लोग यहां पेशाब करते देखे जा सकते हैं। इससे न केवल आने-जाने वाले यात्रियों को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में बदबू और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

दरअसल, गेट नंबर-1 के पास पहले एक यूरिनल मौजूद था। सड़क चौड़ीकरण के दौरान रेलवे अधिकारियों ने उसे तो तुड़वा दिया, लेकिन उसकी जगह नई व्यवस्था करना शायद विकास योजना का हिस्सा नहीं था। परिणाम यह हुआ कि सुविधा खत्म हुई और समस्या सड़क किनारे खड़ी हो गई।

आरपीएफ जवान भी झेल रहे दुर्गंध की सजा
जिस स्थान पर यात्री मजबूरी में खुले में पेशाब कर रहे हैं, उसके ठीक बगल में आरपीएफ का बूथ है। लगातार उठ रही दुर्गंध के बीच ड्यूटी करने वाले जवानों को घंटों वहीं खड़ा रहना पड़ता है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा कर्मियों के लिए भी यह स्थिति असहनीय है, तो यात्रियों की परेशानी का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

बैठकों में ‘यात्री सुविधा’, जमीन पर सिर्फ बदबू
रेलवे में यात्री सुविधाओं को लेकर बैठकों का सिलसिला लगातार चलता रहता है। हाल ही में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक में भी यात्रियों की सुविधाओं पर लंबी चर्चा हुई। लेकिन उन चर्चाओं का असर स्टेशन के सबसे व्यस्त प्रवेश द्वार तक नहीं पहुंच सका।

ऐसा लगता है कि फाइलों में सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं, जबकि जमीन पर यात्रियों के हिस्से में सिर्फ असुविधा और बदबू आ रही है। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के बीच यदि एक निःशुल्क यूरिनल की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है, तो यह व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेलवे प्रशासन यात्रियों को सम्मानजनक और स्वच्छ मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराएगा, या फिर ‘यात्री सुविधा’ की बैठकें सिर्फ चाय, बिस्किट और प्रस्तुतीकरण तक ही सीमित रहेंगी?

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