ठगी का बदला लेने के लिए बनाया गिरोह, एस्कॉर्ट सर्विस में शामिल महिलाओं को बनाता था निशाना

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर। मुगलसराय कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एस्कॉर्ट कारोबार से जुड़ी महिलाओं को ब्लैकमेल कर धन उगाही करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह का मुखिया बुकिंग करके महिलाओं को बुलाता था । इसके बाद उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी और पीड़िताओं या उनके परिजनों से रकम वसूली जाती थी।
पुलिस ने प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के सेमरा गांव निवासी विजय कुमार गुप्ता उर्फ रॉकी, उसकी पत्नी अंजली गुप्ता, भाई और एक अन्य साथी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक विजय पहले स्वयं एस्कॉर्ट सर्विस चलाता था । इस धंधे में महिला से कमीशन में धोखाधड़ी होने के बाद एस्कॉर्ट के धंधे में शामिल महिलाओं से बदला लेने के लिए गिरोह बनाया था।

पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि डायल-112 और एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने के नाम पर बुलाकर बंधक बनाने की शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर महिलाओं को डराया जाता, उनके नग्न फोटो और वीडियो बनाए जाते और फिर इन्हें वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं और उनके परिजनों से रकम वसूली जाती थी।
एक शिकायत ने खोला पूरे गिरोह का राज
पुलिस के अनुसार 27 अगस्त को एक महिला ने मुगलसराय कोतवाली में शिकायत दी। उसने बताया कि 14 मई को नौकरी दिलाने के बहाने उसे रामनगर से डहिया स्थित एक मकान में ले जाया गया। वहां कुछ लोगों और खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाली एक महिला ने उसके साथ मारपीट और गलत हरकत की। एक युवक के साथ उसका वीडियो बनाया गया और परिजनों को वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।
पुलिस के मुताबिक महिला को करीब दो दिन तक बंधक रखा गया। परिजनों से लगभग 30 हजार रुपये मंगवाने के बाद उसे छोड़ा गया। आरोप है कि इस दौरान मोबाइल छीनकर यूपीआई के माध्यम से करीब 75 हजार रुपये भी ट्रांसफर कराए गए।
दूसरी पीड़िता से मांगे पांच लाख
दूसरी महिला के मामले ने गिरोह के कथित तौर-तरीके को और उजागर कर दिया। पुलिस के अनुसार वह 16 अगस्त को ऑनलाइन मकान देखने के लिए आरोपियों के संपर्क में आई थी। आरोपी उसे रामनगर चौराहे से डहिया स्थित मकान पर ले गए। वहां तीन पुरुष और एक महिला ने उसे कमरे में बंधक बना लिया।
आरोप है कि महिला को निर्वस्त्र कर उसका वीडियो बनाया गया और उसे वायरल करने की धमकी देते हुए पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। विरोध करने पर मारपीट और गालीगलौज की गई। आरोपियों ने उसका मोबाइल छीनकर पति को फोन किया और फिरौती मांगी। पुलिस के मुताबिक उसके बैंक खाते से यूपीआई के जरिये 1.14 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। पीड़िता रात में किसी तरह छतों के रास्ते भागकर वहां से निकल सकी।
ठगी का बदला लेने के लिए बनाया गिरोह?
पुलिस अधीक्षक के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी विजय कुमार गुप्ता पहले वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन एस्कॉर्ट सर्विस चलाता था। पुलिस का दावा है कि वर्ष 2023 में एस्कॉर्ट कारोबार से जुड़ी एक महिला से ठगी होने के बाद विजय के मन में इस कारोबार से जुड़ी महिलाओं से बदला लेने की योजना बनी।
इसके बाद उसने साथियों के साथ कथित गिरोह तैयार किया। पुलिस के मुताबिक एस्कॉर्ट सर्विस से जुड़ी महिलाओं को ग्राहक बनकर मकान पर बुलाया जाता था। वहां उन्हें बंधक बनाकर मारपीट करने के बाद जबरन नग्न फोटो-वीडियो बनाए जाते और फिर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं अथवा उनके परिजनों से रकम वसूली जाती थी।
सीबीआई अधिकारी बनकर डराती थी अंजली
पुलिस के अनुसार गिरोह में विजय की पत्नी अंजली गुप्ता की भी सक्रिय भूमिका थी। आरोप है कि वह खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिलाओं को डराती-धमकाती थी। पुलिस का दावा है कि फर्जी और कूटरचित पहचान पत्रों तथा बैंक खातों के जरिये रकम हासिल करने और गिरोह के वित्तीय लेनदेन को संभालने में भी उसकी भूमिका थी।
ऑनलाइन बुकिंग से लेकर फिरौती तक तय था ‘गेम प्लान’
पुलिस के मुताबिक विशंभर विश्वकर्मा ऑनलाइन बुकिंग के बाद महिलाओं को रामनगर चौराहे से डहिया स्थित मकान तक लाता था। मकान पर पहुंचने के बाद महिला को बंधक बनाते और उनके वीडियो बनाते थे। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के जरिये परिजनों से फिरौती की रकम मांगी जाती थी। यानी ऑनलाइन संपर्क से लेकर रकम वसूली तक गिरोह ने कथित तौर पर पूरी प्रक्रिया को एक तय तरीके से संचालित किया।
डहिया के मकान में दबिश, चार गिरफ्तार
आरोपियों की तलाश के दौरान थानाध्यक्ष मुगलसराय अर्जुन सिंह के नेतृत्व में उपनिरीक्षक सूरज, साइबर थाना के उपनिरीक्षक अभिषेक शुक्ला और सर्विलांस टीम ने 28 अगस्त को डहिया बद्रीपुरम कॉलोनी स्थित मकान की घेराबंदी कर दबिश दी। पुलिस के अनुसार मौके से तीन पुरुष और एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि वादिनियों ने मौके पर आरोपियों की पहचान भी की।
मोबाइल, नगदी समेत एटीएम कार्ड और पास बुक बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आठ एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 72,300 रुपये नकद, नौ एटीएम कार्ड, पांच फर्जी आधार कार्ड समेत पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, श्रम कार्ड और कोविड कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा यूनियन बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की पासबुक व चेकबुक, पोर्टेबल वाई-फाई डिवाइस, कथित टॉर्चर किट, एक पल्सर बाइक और एक स्कूटी भी बरामद हुई है। दोनों वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज किया गया है।
पुलिस अब खंगाल रही गिरोह का पूरा नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल छह महिलाओं के साथ इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया है, वही मोबाइल से तीन महिलाओं के वीडियो मिले है जो घटना की पुष्टि करते है।



