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जुआ, देवता और बुकर, समझिए इस सिंडिकेट की पूरी कहानी को.. अंदर-बाहर के गेम में होता है लाखों का वारा-न्यारा

NEWS GURU पीडीडीयू नगर :  मुग़सलराय कोतवाली क्षेत्र स्थित सेमरा गांव के सिवान में पिछले दिनों पुलिस ने छापेमारी कर जुए के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने इस दौरान 14 लोगो को गिरफ्तार किया था, इस मामले में पुलिस ने देवता यादव, मग्गू पटेल और उसके पुत्र को पूरे सिंडिकेट का मुख्य आरोपी बनाया था । इन सबके के बीच पुलिस बुकर का जिक्र करना भूल गई है।

सेमरा गांव में यही होता था जुआ

दरअसल जूए के इस खेल में सबसे महत्वपूर्ण भूमिक बुकर की होती है।  जुए के खेल में लाखों रुपए बुकर के लगाते थे। सूत्र बताते है कि ये बुकर यूपी के विभिन्न जिलों से यहां आते है और पूरे  खेल को अंजाम देते है। सूत्रों के अनुसार देवता और मग्गू जैसे लोग इन्हें प्रति घंटे के हिसाब से जगह देते थे।  जगह देने के एवज ने इन्हें प्रति घंटे 50 हजार से 70 हजार रूपये का रेट मिलता था । हालांकि बुकर किन किन शहर से आते थे ये जांच का विषय है…

क्या होते है बुकर और कैसे होता है इन्हें लाभ

ताश की 52 पत्तियों से बहुत सारे गेम खेल जाते है ।  जुए की फड़ पर अक्सर अंदर – बाहर का गेम होता है । सूत्र बताते है कि जुए के फड़ पर बुकर को अंदर और जो वहां जुआ खेलने आने वाले को बाहर कहा जाता है । गेम शुरू होने के पहले बुकर के आदमी फड़ पर चारो कोनो पर खड़े हो जाते है। अंदर बाहर के खेल में एक घंटे मे 30 से 40 लाख रुपए तक का वारा नारा हो जाता है।  जिस दिन पुलिस ने सेमरा में छापेमारी की थी उस दिन वहां तीन से चार फड़ सजे थे। जुए में अंदर बाहर का गेम काफी पुराना है ।

चंदौली और बनारस में जुए का सिंडिकेट

जुए का सिंडिकेट चन्दौली और बनारस में कोई नया नहीं है।  सूत्रों के अनुसर दोनों जिलों में मिलाकर 5 से 7 स्थानों पर यह अंदर बाहर का खेल होता है। हर जगह बुकर आते है। इसके बाद शुरू होता है जुए जा खेल । सूत्रों के अनुसार बनारस में एसओजी टू की सख्ती के बाद कुछ दिनों के लिए यह खेल गाजीपुर जिले में संचालित हो रहा था।

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