बिना नोटिस मकान गिराने पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा- पहले सुनवाई फिर कार्रवाई

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंदौली जिले के मुगलसराय क्षेत्र में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए किसी भी मकान का ध्वस्तीकरण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित पक्षों को पहले विधिवत नोटिस दिया जाए, उनका पक्ष सुना जाए । साथ ही, आदेश पारित करने से पूर्व जिन अभिलेखों अथवा सामग्रियों पर निर्भर किया जाना है, उनकी प्रतिलिपियां भी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाएं।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि प्रशासन उनके मकानों को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है, जबकि उन्होंने उक्त भूमि जमींदार से पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी है और उनका कब्जा वैध है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित भूमि सड़क के रूप में प्रयुक्त हो रही है और कुछ लोगों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। सुनवाई के दौरान शासन की तरफ हाजिर अधिकवता ने न्यायायलय को आश्वस्त किया कि विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध नोटिसों का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस सही व्यक्तियों को विधिवत तामील कराए गए थे । इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले नए सिरे से नोटिस जारी करे, संबंधित पक्षों को जवाब देने और सुनवाई का अवसर दे तथा जिन दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई प्रस्तावित है उनकी प्रतियां भी उपलब्ध कराए। इन्हीं निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
इस आदेश को बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने के मामलों में “ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ” यानी विधिक प्रक्रिया के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



