तालाब पर बने भवनों पर ध्वस्तीकरण का खतरा! 10 से ज्यादा मकानों को नोटिस, राजस्व विभाग भी सवालों के घेरे में

NEWS GUURU पीडीडीयू नगर । पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के सुभाष नगर (बेचूपुर) में तालाब की जमीन पर बसे दर्जनों परिवारों की नींद उड़ गई है। करीब आठ बीघा सरकारी तालाब की भूमि पर बने 10 से अधिक मकानों को खाली करने का नोटिस जारी होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कब्जा स्वयं नहीं हटाया गया तो पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, राजस्व अभिलेखों में आराजी संख्या-219 की जमीन तालाब के नाम दर्ज है। आरोप है कि वर्षों पहले इस भूमि की प्लॉटिंग कर लोगों को बेच दिया गया और धीरे-धीरे वहां पूरी बस्ती बस गई। कई लोगों ने जीवन भर की जमा-पूंजी लगाकर मकान बनाए, लेकिन अब उनके सिर से छत छिनने का खतरा मंडरा रहा है।

2021 से चल रही थी कानूनी लड़ाई
सूत्रों के अनुसार तालाब की भूमि पर कब्जे का मामला वर्ष 2021 से तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन था। न्यायालय में सुनवाई और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मई 2026 में संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए।
सबसे बड़ा सवाल – जब तालाब था तो बिका कैसे?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यदि जमीन सरकारी तालाब के रूप में दर्ज थी तो उसकी रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और प्लॉटिंग कैसे हो गई? आखिर किसकी निगरानी में तालाब की जमीन पर बस्ती बसती चली गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लॉट खरीदने के दौरान की गई पड़ताल में सबकुछ सही मिला था । अब वर्षों बाद कार्रवाई होने से परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि भूमि विवादित थी तो प्रशासन ने निर्माण के समय कार्रवाई क्यों नहीं की। पूरा मामला प्लांटरों और राजस्व विभाग के गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है ।
विधायक तक पहुंची गुहार
ध्वस्तीकरण की आशंका से परेशान लोगों ने क्षेत्रीय विधायक रमेश जायसवाल से भी मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है। विधायक ने सोशल मीडिया पर मामले का जिक्र करते हुए कहा है कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर प्रशासन से बातचीत की जाएगी।
बेघर होने का डर
सुभाष नगर में रहने वाले कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन भर की कमाई लगाकर मकान बनाए हैं। अब अचानक नोटिस मिलने से उनके सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। लोगों को डर है कि कार्रवाई हुई तो सैकड़ों लोग बेघर हो सकते हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
एक तरफ प्रशासन तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ प्रभावित परिवार राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई केवल मकान मालिकों तक सीमित रहेगी या फिर उन लोगों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिनकी वजह से सरकारी तालाब की जमीन पर पूरी बस्ती बस गई।



