वेतन आते ही बैंक के बाहर लग जाता है जमावड़ा, सूदखोरों के चंगुल में नगर पालिका और रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

एसपी आकाश पटेल की सख्ती के बाद पिछले 07 माह में 14 लोगों के खिलाफ दर्ज हो प्राथमिकी प्राथमिकी,
10 से 15 प्रतिशत ब्याज पर देते हैं रकम
NEWS GUURU पीडीडीयू नगर। जिले में सूदखोरी का अवैध कारोबार अब एक संगठित जाल का रूप लेता जा रहा है। इसकी गिरफ्त में सबसे ज्यादा नगर पालिका और रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फंसे हैं। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ये कर्मचारी ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेते हैं और फिर जिंदगीभर उसकी कीमत चुकाते रहते हैं। हालात ऐसे हैं कि वेतन खाते में पहुंचते ही सूदखोर बैंकों के बाहर पहुंच जाते हैं और कर्मचारियों से ब्याज के नाम पर रकम वसूलने लगते हैं। पिछले सात माह में इस तरह के मामलों में अब तक 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सूदखोरी का नेटवर्क टूटने का नाम नहीं ले रहा है।
दरअसल, सूदखोर जरूरतमंद कर्मचारियों को 10 से 15 प्रतिशत तक ब्याज पर रकम देते हैं। शुरुआत में छोटी रकम का कर्ज देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद ब्याज और मूलधन के नाम पर कई गुना रकम वसूलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पीड़ितों का आरोप है कि कर्ज चुकाने के बाद भी सूदखोरों की मांग खत्म नहीं होती। रुपये देने से इनकार करने पर घर पहुंचकर धमकी देने, जबरन वसूली और परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने तक की धमकियां दी जाती हैं।
वेतन आते ही बैंक के बाहर शुरू हो जाती है वसूली
नगर पालिका और रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सूदखोर खास तौर पर निशाना बना रहे हैं। वजह यह है कि इन कर्मचारियों के खाते में हर महीने निश्चित तारीख पर वेतन पहुंचता है। सूदखोरों को इसकी जानकारी रहती है। वे बैंकों के आसपास जमा हो जाते हैं और वेतन निकलते ही ब्याज की रकम वसूलने लगते हैं। स्थानीय स्तर पर इस तरह की गतिविधियों को लेकर पुलिस की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
केस -1 : पालिका कर्मचारी को रुपए नहीं देने पर मिलती थी धमकी
नगर पालिका पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में कार्यरत सफाईकर्मी परशुरामपुर निवासी लक्ष्मण ने सूदखोरों से जरुरत पड़ने पर पांच साल पहले कर्ज लिया था । आरोप है कि ब्याज सहित कर्ज का भुगतान करने पर सूदखोर रुपए की मांग करते हुए आए दिन गाली गलौज करते थे और जान से मारने की धमकी भी देते थे । पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी ।
केस-2 : 50 हजार रुपये का कर्ज, अब तक 10 लाख की वसूली
सकलडीहा थाना क्षेत्र के नौरंगाबाद निवासी हफीजुर्रहमान, रफीकुल्लाह और नसीर ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वर्ष 2025 में क्षेत्र के एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये उधार लिए थे। उनका दावा है कि पूरी रकम लौटाने के बाद भी आरोपी धमकी देकर उनसे जबरन रुपये वसूलता रहा। तहरीर के मुताबिक, अब तक उनसे करीब 10 लाख रुपये तक लिए जा चुके हैं। रुपये नहीं देने पर घर पर जबरन काम कराने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
केस-3 : गहने बेचकर लौटाए 6.70 लाख, फिर भी मिल रही धमकी
सकलडीहा थाना क्षेत्र के होड़िला गांव निवासी अफसाना ने पुलिस को दी तहरीर में तीन लोगों पर जबरन रुपये वसूलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में आरोपियों से रुपये लिए थे। इसके एवज में अपने सभी गहने बेचकर एक लाख 70 हजार रुपये ऑनलाइन और पांच लाख रुपये नकद लौटा दिए। इसके बाद भी आरोपी हर महीने रुपये मांगते रहे। रकम नहीं देने पर उनके पुत्र को उठाने की धमकी देने का भी आरोप है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
केस-4 : कर्ज चुकाने के बाद भी मांगे ज्यादा रुपये, परिवार को धमकी
मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के हनुमानपुर निवासी रेलवे कर्मचारी अभिषेक सिंह ने 23 मार्च 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर के मुताबिक, वर्ष 2024 में इलाज के लिए पांच प्रतिशत ब्याज पर 3,46,500 रुपये उधार लिए थे। इसमें से 2,64,500 रुपये जनवरी 2025 तक नकद और ऑनलाइन माध्यम से लौटा दिए थे। शेष रकम किस्तों में दी जा रही थी, लेकिन आरोपियों ने अतिरिक्त रुपये की मांग शुरू कर दी। रुपये देने से इनकार करने पर हत्या कराने और घर में आग लगाने तक की धमकी देने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
नगर पालिका और रेलवे के कर्मचारी सबसे ज्यादा निशाने पर
सूदखोरी के इस नेटवर्क में नगर पालिका और रेलवे के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। कर्मचारियों को आर्थिक जरूरत के समय आसानी से रकम मिल जाती है, लेकिन बाद में यही कर्ज उनके लिए मुसीबत बन जाता है। शिकायतों के मुताबिक, सूदखोर कर्मचारियों के विभाग, बैंक खाते और वेतन आने की तारीख तक की जानकारी रखते हैं। वेतन निकलने के बाद वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है।
बिना लाइसेंस साहूकारी का कारोबार करना पड़ सकता है भारी
उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक स्तर पर ब्याज पर रुपये उधार देने के लिए साहूकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिना लाइसेंस साहूकारी का कारोबार करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। लाइसेंस संबंधी जानकारी के लिए आधार, पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और आयकर रिटर्न जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
पुलिस का दावा- शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक चंदौली आकाश पटेल के मुताबिक, जिले में अवैध रूप से ब्याज पर रुपये देने वालों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। सूदखोरी से परेशान किए जाने की शिकायत मिलने पर पीड़ित संबंधित थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों को भी जागरूक रहने और ऐसे लोगों के दबाव में नहीं आने की जरूरत है।



