तहरी में कीड़ा मिला, जांच हुई… अब रिपोर्ट पर पर्दा क्यों?

13 विद्यालयों में एक ही एनजीओ सप्लाई करता है एमडीएम, पूर्वी बाजार के स्कूल की घटना के बाद बीएसए की चुप्पी पर उठे सवाल…
NEWS GUURU पीडीडीयू नगर। बच्चों को परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित कंपोजिट विद्यालय पूर्वी बाजार में बच्चों को परोसी गई तहरी में कीड़ा मिलने के मामले में जांच कमेटी गठित होने के बाद अब जांच रिपोर्ट को लेकर विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
बताया जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई थी। सूत्रों के अनुसार नगर क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की ओर से जांच रिपोर्ट तैयार कर बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप भी दी गई है। बावजूद इसके रिपोर्ट में क्या सामने आया और जिम्मेदारी किसकी तय हुई, इस पर विभाग खुलकर कुछ बताने को तैयार नहीं है।
13 स्कूलों में एक ही एजेंसी की सप्लाई
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि नगर क्षेत्र के 13 विद्यालयों में एक एनजीओ की ओर से एमडीएम की सप्लाई किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में एक विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायत केवल एक स्कूल तक सीमित सवाल नहीं रह जाती, बल्कि अन्य विद्यालयों में बच्चों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जांच में तहरी में कीड़ा मिलने की घटना सही पाई गई है तो जिम्मेदारी किसकी तय हुई? या फिर पूरे मामले को एक दुर्घटना बताकर पूरी जांच पर पूर्ण विराम लगा दिया गया ।
जांच रिपोर्ट आई, लेकिन जवाब गायब
मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी से जांच रिपोर्ट और कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया। फोन किए गए, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। संदेश के जरिए भी रिपोर्ट के निष्कर्ष और कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी गई, मगर कोई जवाब नहीं मिला।
यही चुप्पी अब विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है। बच्चों की थाली में कीड़ा मिलने की शिकायत पर जांच कराना तो जरूरी था ही, लेकिन जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है।
बच्चों की थाली से बड़ा सवाल जवाबदेही का
एमडीएम का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन में कीड़ा मिलने जैसी शिकायत को महज एक सामान्य लापरवाही मानकर छोड़ना गंभीर होगा। खासकर तब, जब एक ही एनजीओ से कई विद्यालयों में भोजन पहुंचाया जा रहा हो।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगा या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा? यदि जांच में लापरवाही सामने आई है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी अभिभावकों और जनता को क्यों नहीं दी जा रही?
बच्चों की थाली में कीड़ा मिलने के बाद जांच तो हो गई, लेकिन अब विभाग की खामोशी ही सबसे बड़ा सवाल बन गई है।



